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NATIONAL HIGH SPEED RAIL CORPORATION LIMITED

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड

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परियोजना अवलोकन

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना: एक उज्ज्वल भविष्य की राह

इस परियोजना को क्रियान्वित करने वाली संस्था नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को 12 फरवरी 2016 में कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भारत में हाई स्पीड रेल कॅारिडोर के वित्तपोषण, निर्माण, रखरखाव एवं प्रबंधन के उद्देश्य से निगमित किया गया था। कंपनी को केंद्र सरकार द्वारा रेल मंत्रालय और दो राज्य सरकारों यानी गुजरात सरकार तथा महाराष्ट्र सरकार के माध्यम से इक्विटी भागीदारी के साथ संयुक्त क्षेत्र में ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ के रूप में प्रतिरूपित किया गया है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत (कर हटाकर) 1,08,000 करोड़ रुपये (17 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है और इसे जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (JICA) से आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। 

परियोजना की कुल लागत का लगभग 81% जापान सरकार द्वारा जे.आई.सी.ए. (JICA) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा। परियोजना की शेष लागत भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित की जाएगी। ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ की इक्विटी संरचना के अनुसार, भारत सरकार की हिस्सेदारी रेल मंत्रालय के माध्यम से 50% है, और महाराष्ट्र सरकार और गुजरात सरकार की हिस्सेदारी 25% -25% है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए स्वीकृत वित्तपोषण का अधिकांश हिस्सा जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से ओडीए ऋण के माध्यम से प्राप्त हुआ है। ऋण की अवधि 50 वर्ष है, जिसमें 15 वर्ष की स्थगन अवधि शामिल है।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल(MAHSR)

 

इस परियोजना को क्रियान्वित करने वाली संस्था नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को 12 फरवरी 2016 में कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत भारत में हाई स्पीड रेल कॅारिडोर के वित्तपोषण, निर्माण, रखरखाव एवं प्रबंधन के उद्देश्य से निगमित किया गया था। कंपनी को केंद्र सरकार द्वारा रेल मंत्रालय और दो राज्य सरकारों यानी गुजरात सरकार तथा महाराष्ट्र सरकार के माध्यम से इक्विटी भागीदारी के साथ संयुक्त क्षेत्र में ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ के रूप में प्रतिरूपित किया गया है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत (कर हटाकर) 1,08,000 करोड़ रुपये (17 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है और इसे जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (JICA) से आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है। 

परियोजना की कुल लागत का लगभग 81% जापान सरकार द्वारा जे.आई.सी.ए. (JICA) के माध्यम से वित्त पोषित किया जाएगा। परियोजना की शेष लागत भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित की जाएगी। ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल’ की इक्विटी संरचना के अनुसार, भारत सरकार की हिस्सेदारी रेल मंत्रालय के माध्यम से 50% है, और महाराष्ट्र सरकार और गुजरात सरकार की हिस्सेदारी 25% -25% है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए स्वीकृत वित्तपोषण का अधिकांश हिस्सा जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से ओडीए ऋण के माध्यम से प्राप्त हुआ है। ऋण की अवधि 50 वर्ष है, जिसमें 15 वर्ष की स्थगन अवधि शामिल है।

परियोजना

इस परियोजना के लिए 100% भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। 1390 हेक्टेयर में से 430 हेक्टेयर महाराष्ट्र में है और 960 हेक्टेयर गुजरात तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली में है।

लगभग 90% एलाइनमेंट एलिवेटेड है और इसका निर्माण मुख्यत: फुल स्पैन लॅान्चिंग मेथड FSLM का उपयोग करके किया जा रहा है। देश में पहली बार निर्माण की इस खास विधि का उपयोग किया जा रहा है। भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से एक है जो इस तकनीक का उपयोग करते हुए इसमें विशेषज्ञता कर रहा है।

वायाडक्ट के निर्माण हेतु उपयोग की जाने वाली FSLM तकनीक कन्वेंसनल सेगमेंटल निर्माण तकनीक की तुलना में 10 गुना तेज होती है।

राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों, सिंचाई नहरों, नदी, रेलवे पटरियों आदि पर बने इस कॅारिडोर पर  60 मीटर और 130 + 100 मीटर (निरंतर) के बीच के स्पैन के 28 स्टील ब्रिज बनाने की योजना है।

इसके अलावा, मार्ग पर 25 नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 21 पुल गुजरात में तथा 4 पुल महाराष्ट्र में हैं।

वडोदरा के पास दिल्ली-मुंबई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे पर 230 मीटर लंबा ‘मेक इन इंडिया’ स्टील ब्रिज और नवसारी जिले में पूर्णा नदी पर पुल

एमएएचएसआर कॅारिडोर पर 8 पर्वतीय सुरंगें होंगी, जिनका निर्माण न्यू अॅास्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग करके किया जाएगा। इनमें से सात सुरंगें महाराष्ट्र के पालघर जिले में हैं, जबकि एक गुजरात के वलसाड जिले में है।

संचालन के दौरान उत्पन्न होने वाले शोर को कम करने के लिए वायाडक्ट के दोनों ओर नॉइस बैरियर्स लगाए जा रहे हैं।

भारत की पहली समुद्र के नीचे बनने वाली रेल सुरंग

इस एलाइनमेंट में 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें ठाणे क्रीक के नीचे भारत की पहली 7 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे बनने वाली सुरंग भी शामिल है। इस टनल का निर्माण दो तकनीकों के संयोजन का उपयोग करके किया जाएगा - सुरंग के 5 किलोमीटर हिस्से को बनाने के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) और शेष 16 किलोमीटर को बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन (TBM) का इस्तेमाल किया जाएगा।

13.1 मीटर व्यास की एक सुरंग में दोनों पटरियों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना में 13.6 मीटर व्यास के कटर हेड का उपयोग किया जा रहा है जो भारत में किसी भी रेलवे परियोजना हेतु सबसे बड़ा है।

बुलेट ट्रेन स्टेशन - उच्चतम तकनीक और सुविधाएँ

इस कॅारिडोर पर स्थित 12 स्टेशनों में से प्रत्येक का डिज़ाइन उस शहर की विचारधारा को दर्शाएगा जिसमें यह स्थित है। इससे स्थानीय लोगों के साथ जुड़ाव होगा और हाई-स्पीड रेल प्रणाली के स्वामित्व की भावना को बढ़ावा मिलेगा। स्टेशनों के अगले हिस्से को समकालीन वास्तुशिल्प और अत्याधुनिक मार्डन फिनिश के साथ डिज़ाइन किया जा रहा है। 

सुगम यात्रा के लिए, एलाइनमेंट पर स्थित स्टेशनों को मेट्रो, बसों, टैक्सियों और ऑटो जैसे अन्य साधनों के साथ एकीकरण के ज़रिए परिवहन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि स्टेशन से और स्टेशन तक बेहतर, तेज़ और सुविधाजनक कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सके। इस तरह के इंटरफेस से यात्रा का समय कम होगा, पहुँच बढ़ेगी और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हमारे शहरों में भीड़भाड़ और उत्सर्जन कम होगा।

यात्रियों की सुविधा तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए, स्टेशन के आसपास के क्षेत्रों को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD)की नीतियों के अनुसार विकसित करने की योजना बनाई गई है। गुजरात में साबरमती व सूरत और महाराष्ट्र में विरार व ठाणे के स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों को भी स्टेशन क्षेत्र विकास योजनाओं को तैयार करने हेतु संबंधित राज्य प्राधिकरणों द्वारा चयनित किया गया है।

विभिन्न परिवहन साधनों के सुगम एकीकरण के लिए, गुजरात में साबरमती बुलेट ट्रेन स्टेशन को मेट्रो, बीआरटीएस, रेलवे आदि विभिन्न परिवहन साधनों से जोड़ने के लिए एक मल्टीमॉडल ट्रांजिट टर्मिनल का निर्माण किया गया है।

तेज़तर भविष्य के लिए विद्युतीय प्रगति

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए गुजरात में सूरत-बिलिमोरा बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच वायाडक्ट पर स्टील मास्ट इंस्टालेशन के साथ विद्युतीकरण कार्य शुरू हो गया है। 

पूरे कॉरिडोर में 9.5 से 14.5 मीटर की ऊंचाई वाले 20,000 से अधिक स्टील मास्ट लगाए जायेंगे। ये मास्ट ओवरहेड उपकरण (OHE) प्रणाली का सपोर्ट करेंगे, जिसमें ओवरहेड तार, अर्थिंग सिस्टम, फिटिंग और संबंधित सहायक उपकरण शामिल हैं, जो बुलेट ट्रेन चलाने के लिए उपयुक्त एमएएचएसआर कॉरिडोर के लिए पूर्ण 2x25 के वी ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम का निर्माण करेंगे। जापानी शिंकानसेन प्रणाली पर आधारित OHE कैंटिलीवर को वायाडक्ट  पर लगाया जा रहा है।

एमएएचएसआर सं रेखण के साथ बिजली आपूर्ति ट्रांसमिशन लाइन के लिए ट्रैक्शन सबस्टेशन (TSS) और डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन (DSS) का एक नेटवर्क निर्माणाधीन है।

मेक इन इंडिया नीति को बढ़ावा देते हुए, जापानी मानक डिजाइन और विनिर्देशों के अनुरूप ये OHE मास्ट भारत में निर्मित किये गए हैं जो हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम को सपोर्ट करेंगे।

ट्रैक निर्माण प्रणाली

इस परियोजना के लिए जापानी शिंकानसेन ट्रैक तकनीक पर आधारित गिट्टी रहित ट्रैक के जे-स्लैब ट्रैक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। यह पहली बार है, जब भारत में जे-स्लैब गिट्टी रहित ट्रैक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। 

ट्रैक बिछाने की पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक मशीनरी द्वारा की जा रही है, जिसे विशेष रूप से जापानी विनिर्देशों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है। ट्रैक बनाने के लिए रेल फीडर कार, ट्रैक स्लैब लेइंग कार, सीएएम लेइंग कार और फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन जैसी मशीनों का उपयोग किया जाएगा। ट्रैक निर्माण को सुविधाजनक बनाने के लिए, ट्रैक निर्माण बेस (टीसीबी) की स्थापना की गई है, जिसमें जमीन और पुल पर रेल, ट्रैक स्लैब, मशीनों और उपकरणों की हैंडलिंग शामिल है। शिंकानसेन ट्रैक निर्माण कार्यों की कार्यप्रणाली को समझने के लिए, जापानी विशेषज्ञों द्वारा संबंधित क्षेत्रों में विभिन्न विषयों पर भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए प्रशिक्षण एवं प्रमाणन पाठ्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आरामदायक व सुरक्षित यात्रा

इस कॅारिडोर की ट्रेनें अत्याधुनिक ट्रेनसेट हैं, जिनमें यात्रियों के आराम एवं सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा गया है। ट्रेनों को भारतीय पर्यावरण संबंधी परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है। गुजरात में साबरमती व सूरत तथा महाराष्ट्र में ठाणे में तीन रोलिंग स्टॉक डिपो का निर्माण किया जा रहा हैं।

ऊर्जा संबंधी जरुरतों को पूरा करने के लिए, कॅारिडोर के साथ 12 ट्रैक्शन सबस्टेशन, 2 डिपो ट्रैक्शन सबस्टेशन और 16 वितरण सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं।

उज्जवल भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम

बुलेट ट्रेन परियोजना से निर्माण एवं संचालन के दौरान रोजगार का सृजन होने से आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिल रहा है, साथ ही इससे स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में निवेश भी आ रहा है और उनका नए तरीके से विकास हो रहा है। आवागमन के साधन और कनेक्टिविटी में सुधार करके, बुलेट ट्रेन से शहरों के बीच यात्रा का समय कम होगा, श्रमिक उत्पादकता बढ़ेगी तथा व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

परियोजना द्वारा छोटे शहरों जैसे वापी, बोईसर, भरूच, आणंद और नाडियाड, जहाँ हवाई अड्डे की सुविधा नहीं है, को अहमदाबाद, मुंबई, सूरत और वडोदरा जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों से जोड़ा जायेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को संतुलित रूप से बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना विकसित भारत, सक्षम भारत एवं सशक्त भारत के सृजन के लिए भारत की अवसंरचना और कनेक्टिविटी में परिवर्तन लाने की पीएम गतिशक्ति पहल के अनुरूप है।