नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) द्वारा 6 सितंबर 2025 को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए महाराष्ट्र के सखारे गांव, दहानू में फुल स्पैन लॉन्चिंग गैन्ट्री (एफएसएलजी) के माध्यम से 40 मीटर लम्बे पहले फुल स्पैन प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) बॉक्स गर्डर को लॉन्च किया गया।
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का महाराष्ट्र सेगमेंट 156 कि.मी. लंबा है, जिसमें शिलफाटा से ज़ारोली गांव (महाराष्ट्र-गुजरात सीमा) तक 135 कि.मी. का एलिवेटेड मार्ग शामिल है। 103 कि.मी. के इस एलिवेटेड सेगमेंट को जिसे वायाडक्ट कहा जाता है, 2,575 फुल स्पैन गर्डर (40 मीटर लंबे, लगभग 970 मीट्रिक टन वजन) के माध्यम से निर्मित किए जाने की योजना है। अन्य संरचनाओं में 17 कि.मी. सेगमेंटल गर्डर्स, 2.3 कि.मी. स्टील ब्रिज, 3 स्टेशन, 7 पर्वत सुरंगें (लगभग 6 कि.मी.) और विशेष पृथ्वी संरचनाएं शामिल हैं।
शिलफाटा और गुजरात-महाराष्ट्र सीमा के बीच कुल 13 कास्टिंग यार्ड की योजना बनाई गई है, जिनमें से 5 वर्तमान में चालू हैं।
इस स्थापित तकनीक का उपयोग अप्रैल 2021 से बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए किया जा रहा है, जिससे गुजरात में कुल 319 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट को पूरा करने में सहायता मिली है।
फुल स्पैन गर्डर्स और उनकी लॉन्चिंग के बारे में अतिरिक्त जानकारी
प्रत्येक 40 मीटर लम्बे पीएससी बॉक्स गर्डर का वजन लगभग 970 मीट्रिक टन है, जो इसे भारत के निर्माण उद्योग में सबसे भारी घटक बनाता है। इन गर्डरों को एक एकल अखंड इकाई के रूप में - बिना निर्माण जोड़ों के - 390 घन मीटर कंक्रीट और 42 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग करके ढाला गया है। बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए फुल स्पैन गर्डर को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि वे सेगमेंटल गर्डर की तुलना में निर्माण कार्य को 10 गुना अधिक तेजी से पूरा करने में सक्षम बनाते हैं।
फुल स्पैन प्री-कास्ट बॉक्स गर्डरों को विशेष स्वदेशी भारी मशीनरी जैसे स्ट्रैडल कैरियर, ब्रिज लॉन्चिंग गैंट्री, गर्डर ट्रांसपोर्टर और लॉन्चिंग गैंट्री का उपयोग करके लॉन्च किया जा रहा है। निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, गर्डरों को पहले से ही ढाला जाता है और उन्हें डेडिकेटेड कास्टिंग यार्डों में व्यवस्थित रूप से रखा जाता है।
महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति
(05 सितम्बर 2025 तक)
- तीनों एलिवेटेड स्टेशनों, यानी ठाणे, विरार और बोईसर, पर काम तेज़ी से चल रहा है। विरार और बोईसर स्टेशनों के लिए पहला स्लैब कास्ट किया जा चुका है।
- पूरे मार्ग के साथ कई स्थानों पर पियर्स की नींव और पियर्स का काम प्रगति पर है। अब तक लगभग 48 किलोमीटर पियर्स की ढलाई की जा चुके हैं
- पालघर जिले के दहानु क्षेत्र में फुल स्पैन बॉक्स गर्डर लॉन्चिंग के माध्यम से पुल निर्माण कार्य शुरू हो गया है
- पालघर जिले में 7 पर्वतीय सुरंगों की खुदाई का कार्य प्रगति पर है। अब तक 6 किलोमीटर में से कुल 2.1 किलोमीटर सुरंग का काम पूरा हो चुका है
- वैतरणा, उल्हास और जगानी नदी पर पुलों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है
- बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित मुंबई बुलेट ट्रेन भूमिगत स्टेशन और महाराष्ट्र राज्य के शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी भारत की पहली भूमिगत/समुद्री सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा है। 21 किलोमीटर सुरंग निर्माण कार्य में से 16 किलोमीटर सुरंग बोरिंग मशीनों के माध्यम से तथा शेष 5 किलोमीटर एनएटीएम के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें ठाणे क्रीक पर 7 किलोमीटर की समुद्र के नीचे सुरंग भी शामिल है।
- लगभग 4.65 किलोमीटर सुरंग हेडिंग को शिलफाटा तथा एडीआईटी पोर्टल से दो समानांतर फेस द्वारा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) के माध्यम से पूरा किया जा चुका है।
- विक्रोली (56 मीटर की गहराई पर) और सावली शाफ्ट (39 मीटर की गहराई पर) दोनों पर बेस स्लैब की ढलाई पूरी हो चुकी है।
- शाफ़्ट स्थानों पर स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है और महापे टनल लाइनिंग कास्टिंग यार्ड में टनल लाइनिंग सेगमेंट का निर्माण किया जा रहा है
- बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित निर्माणाधीन मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन पर 83% खुदाई का काम पूरा हो चुका है। स्टेशन स्थल के दोनों छोर पर ज़मीन से 100 फीट नीचे बेस स्लैब की ढलाई का काम शुरू हो चुका है।

