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- कॉरिडोर की कुल लंबाई: 508 कि.मी. (गुजरात व डीएनएच: 352 कि.मी., महाराष्ट्र: 156 कि.मी.)
- 12 थीम आधारित बुलेट ट्रेन स्टेशन (गुजरात: साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलीमोरा, वापी व महाराष्ट्र: बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई)
- वायडक्ट निर्माण: 317 कि.मी.
- पियर कार्य: 396 कि.मी.
- पियर फाउंडेशन: 407 कि.मी.
- गर्डर कास्टिंग: 337 कि.मी.
- 17 नदियों पर पुल का निर्माण पूरा किया जा चुका है: पार (वलसाड), पूर्णा (नवसारी), मिन्धोला (नवसारी), अम्बिका (नवसारी), औरंगा (वलसाड), वेगनिया (नवसारी), मोहर (खेड़ा), धाधर (वडोदरा), कोलक (वलसाड), वत्रक (खेड़ा), कावेरी (नवसारी), खरैरा (नवसारी), मेश्वा (खेड़ा), किम (सूरत), दरोथा (वलसाड), दमन गंगा (वलसाड) और विश्वामित्रि (वडोदरा)
- आठ स्टील ब्रिज, 2x100 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का पहला 100 मीटर का हिस्सा और पांच पीएससी (प्री स्ट्रेस्ड कंक्रीट) ब्रिज पूरे किये जा चुके हैं
- गुजरात में वायाडक्ट पर नॉइज़ बैरियर लगाने का काम चल रहा है। लगभग 3,90,000 नॉइज़ बैरियर 195 कि.मी. लंबे खंड पर लगाए जा चुके हैं
- गुजरात में 198 ट्रैक कि.मी. ट्रैक बेड निर्माण पूरा किया जा चुका है। वायाडक्ट पर 200 मीटर लंबे रेल पैनल बनाने हेतु वेल्डिंग कार्य प्रगति पर है
- गुजरात में ओवरहेड इक्विपमेंट मास्ट (ओएचई) लगाने का काम चल रहा है। सूरत-बिलिमोरा बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच करीब 1600 ओएचई मास्ट लगाए गए हैं, जो मेनलाइन वायडक्ट के करीब 40 किलोमीटर हिस्से को कवर करते हैं
- महाराष्ट्र में बीकेसी और शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम निर्माणाधीन है। न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि (एनएटीएम) के माध्यम से शिलफाटा और एडीआईटी पोर्टल से दो समवर्ती फेस से लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है।
- पालघर ज़िले में सात पहाड़ी सुरंगों की खुदाई का काम चल रहा है, कुल 6 कि.मी. में से 2 कि.मी. कार्य पूरा हो गया है
- गुजरात में सभी आठ स्टेशनों का संरचनात्मक कार्य पूरा हो गया है, बिल्डिंग इंटीरियर व फिनिशिंग कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
- तीनों एलिवेटेड स्टेशनों पर काम शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र में मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन पर बेस स्लैब डाली जा रही है
- विरार और बोईसर बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए पहली स्लैब कास्टिंग पूरी हो गई है

